ओडिशा के ढेंकनाल जिले से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। शनिवार देर रात गोपालपुर गांव के पास स्थित एक अवैध पत्थर खदान में शक्तिशाली विस्फोट (Explosion) होने से दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। मलबे के नीचे अभी भी कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है जिन्हें निकालने के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

आदेशों की धज्जियां उड़ाकर हो रहा था धमाका

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जिस खदान में यह हादसा हुआ उसे बंद करने का आदेश पहले ही दिया जा चुका था। जिला खनन कार्यालय ने 8 सितंबर 2025 को ही इस खदान के पट्टाधारक को काम बंद करने का निर्देश जारी किया था। खदान के पास विस्फोट करने की अनिवार्य अनुमति (Mandatory Permission) नहीं थी। इसके बावजूद, नियमों को ताक पर रखकर रात के अंधेरे में वहां अवैध रूप से ब्लास्टिंग की जा रही थी।

रेस्क्यू ऑपरेशन: पत्थरों के नीचे दबी जिंदगी

धमाका इतना तेज था कि खदान का एक बड़ा हिस्सा धंस गया और पत्थर की विशाल शिलाएं नीचे काम कर रहे मजदूरों पर गिर गईं। दमकल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पत्थर इतने बड़े हैं कि उन्हें हाथों से हटाना नामुमकिन है। इसलिए मौके पर भारी मशीनरी और खोजी दलों (Search Teams) को लगाया गया है। प्रशासन ने बचाव कार्य के लिए कुल 7 टीमें भेजी हैं। फिलहाल घटनास्थल को पूरी तरह सील कर दिया गया है और वहां आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई है।

जवाबदेही पर उठे सवाल

इस हादसे ने स्थानीय प्रशासन और खनन विभाग की सतर्कता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पट्टा खत्म होने के बावजूद खदान में गतिविधियां जारी थीं। फिलहाल जिला खनन अधिकारी और खदान मालिक (Leaseholder) से संपर्क नहीं हो पाया है, वे फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हादसे के वक्त खदान के अंदर कुल कितने मजदूर मौजूद थे।

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