अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि अगर केरल का सच्चा विकास चाहते हैं, तो राज्य में भाजपा की सरकार का आना बेहद जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के सपने का जिक्र करते हुए कहा कि केरल को भी इस विकास यात्रा का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने केरल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर भी टिप्पणी की।

अमित शाह ने आरोप लगाया कि राज्य में सत्ता में रही एलडीएफ (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट) और यूडीएफ (यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) सरकारों ने केरल को राष्ट्र विरोधी ताकतों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बना दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा, “अगर जनता केरल में बदलाव चाहती है तो एलडीएफ या यूडीएफ इसे नहीं ला सकते। बदलाव लाने के लिएराजग (NDA) और भाजपा को वोट देना होगा।” उन्होंने कहा कि भाजपा केरल की राजनीतिक गतिविधियों से पूरी तरह वाकिफ है और उनका लक्ष्य राज्य में एनडीए की सरकार बनाना है।

केंद्रीय गृहमंत्री ने अपने भाषण में आतंकवाद और पाकिस्तान का भी जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के अलावा कोई भी आतंकवाद को जवाब नहीं दे सकता है।” शाह ने पहलगाम हमले के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उदाहरण दिया, जिसके तहत भारतीय सेना ने आतंकियों को उनकी सीमा में घुसकर मारा था. यह बयान केंद्र सरकार की आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को दर्शाता है।

भाजपा और कम्युनिस्ट पार्टी में अंतर बताया

अमित शाह ने भाजपा और कम्युनिस्ट पार्टी के बीच के बुनियादी अंतर को भी समझाया। उन्होंने कहा, “भाजपा ने कार्यकर्ता सम्मेलन को अन्य राजनीतिक दलों के सार्वजनिक सम्मेलन जितना ही बड़ा बना दिया है और यह केरल में भाजपा के भविष्य का प्रतीक है। अब हम विकसित केरल की कल्पना कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “कम्युनिस्ट पार्टी और बीजेपी दोनों ही कैडर बेस पार्टी हैं, लेकिन बीजेपी और उनमें ये अंतर है कि कम्युनिस्ट पार्टी सिर्फ कैडर का विकास करती है, जबकि बीजेपी पूरे देश और समाज के विकास के लिए काम करती है।”

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