भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद केरल के अपने पहले दौरे पर पहुंचे नितिन नबीन ने राज्य में पार्टी के विधानसभा चुनाव अभियान की औपचारिक शुरुआत के संकेत दे दिए हैं. दो दिवसीय दौरे के दौरान उन्होंने धार्मिक, संगठनात्मक और राजनीतिक गतिविधियों के जरिए स्पष्ट संदेश दिया कि भाजपा अब केरल में आक्रामक चुनावी मोड में है.

शनिवार को दौरे के दूसरे दिन नितिन नबीन ने नौवीं सदी के महान दार्शनिक आदि शंकराचार्य के जन्मस्थान कलाडी में मंदिर दर्शन कर पूजा-अर्चना की. इसके बाद वह सीधे राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय नजर आए. त्रिशूर जिले के ओल्लुरक्कारा इलाके में उन्होंने पोलिंग बूथ संख्या 163 की दीवार पर भाजपा के चुनाव चिह्न ‘कमल’ का चित्र बनाया. पार्टी नेताओं ने इस कदम को पूरी तरह प्रतीकात्मक बताते हुए कहा कि यह केरल में भाजपा के जमीनी स्तर के चुनाव अभियान की औपचारिक शुरुआत का संकेत है.

बता देंस, त्रिशूर को इस संदेश के लिए खास तौर पर चुना गया है. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में इसी सीट से अभिनेता से नेता बने सुरेश गोपी ने जीत हासिल की थी, जो केरल में भाजपा की पहली लोकसभा जीत मानी जाती है. पार्टी अब इसी सफलता को विधानसभा चुनाव में भुनाने की रणनीति बना रही है. अपने दौरे के दौरान नितिन नबीन ने संगठनात्मक स्तर पर भी कई अहम बैठकें कीं.

30 विधानसभा सीटों पर फोकस करने की तैयारी में भाजपा 

शुक्रवार को उन्होंने कोच्चि में भाजपा की राज्य कोर कमेटी की बंद कमरे में बैठक की अध्यक्षता की. इस बैठक में राज्य भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर और एनडीए के घटक दलों के नेता भी मौजूद रहे. सूत्रों के अनुसार, नबीन ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पार्टी को अपने बढ़ते वोट शेयर को विधानसभा सीटों में तब्दील करना होगा. बैठक में विशेष रूप से उन 30 विधानसभा सीटों पर फोकस करने को कहा गया, जहां पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को 30 प्रतिशत से अधिक वोट मिले थे. नबीन ने यह भी रेखांकित किया कि करीब 10 प्रतिशत ऐसे स्विंग वोटर, जो न तो एलडीएफ और न ही यूडीएफ के साथ हैं, इन सीटों पर चुनावी नतीजों को निर्णायक रूप से बदल सकते हैं.

भाजपा सबरीमाला सोना चोरी मामले और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के विकास कार्यों को प्रमुख चुनावी मुद्दों के रूप में आगे बढ़ाने की योजना बना रही है. नबीन ने एलडीएफ और यूडीएफ दोनों पर सबरीमाला और सनातन धर्म को कमजोर करने का आरोप लगाया और कहा कि मतदाता इसके लिए दोनों गठबंधनों को जिम्मेदार ठहराएंगे. उन्होंने यह भी साफ किया कि केरल भाजपा में गुटबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

नबीन ने चेतावनी दी कि यदि चुनाव के बाद पार्टी एक मजबूत राजनीतिक ताकत के रूप में उभरने में विफल रही, तो संगठन में बड़े बदलाव किए जाएंगे. 90 दिनों के गहन चुनावी रोडमैप, उम्मीदवारों के जल्द चयन और जमीनी स्तर पर सक्रिय लामबंदी के साथ भाजपा नेतृत्व का मानना है कि केरल में चुनावी अभियान अब औपचारिक रूप से शुरू हो चुका है.

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