सड़क पर ड्राइविंग के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल कितनी बड़ी तबाही ला सकता है, इसका एक खौफनाक उदाहरण दनकौर के डेरी गुजरान गांव में देखने को मिला। जहां एक ईंट-भट्ठा मालिक की लापरवाही ने एक गरीब मजदूर की 3 साल की बेटी की जिंदगी को संकट में डाल दिया। मोबाइल देखते हुए कार चला रहे मालिक ने खेल रही बच्ची पर गाड़ी चढ़ा दी।

खेलते-खेलते मलबे में तब्दील हुई खुशियां
मूल रूप से अलीगढ़ के रहने वाले पंकज कुमार पिछले कई सालों से डेरी गुजरान गांव के एक ईंट-भट्ठे पर मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। उनकी 3 साल की बेटी सारिका भट्ठे के पास ही खेल रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित पिता के अनुसार, भट्ठा मालिक अपनी कार से वहां से गुजर रहा था। ड्राइविंग के दौरान उसका पूरा ध्यान सड़क के बजाय अपने मोबाइल फोन पर था। मोबाइल में मशगूल मालिक को सामने खेल रही बच्ची दिखाई ही नहीं दी और तेज रफ्तार कार सारिका के ऊपर चढ़ गई। मौके पर चीख-पुकार मच गई और लहूलुहान बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाया गया।

मासूम के दोनों पैर टूटे, परिवार के पास इलाज के पैसे नहीं
इस दर्दनाक हादसे ने मासूम सारिका के शरीर को बुरी तरह जख्मी कर दिया है। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्ची के दोनों पैरों की हड्डियां कई जगह से टूट गई हैं। शरीर के अन्य हिस्सों में भी अंदरूनी चोटें आई हैं। पंकज कुमार का आरोप है कि उनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब है और भट्ठा मालिक, जिसकी गलती से यह सब हुआ, वह मदद करने के बजाय पल्ला झाड़ रहा है।

पुलिस की कार्रवाई और आश्वासन
घटना के बाद पीड़ित परिवार दनकौर कोतवाली पहुंचा और न्याय की मांग की। मुनेंद्र सिंह (कोतवाली प्रभारी, दनकौर) का कहना है कि परिजनों ने मामले की जानकारी दी है। हालांकि अभी लिखित शिकायत नहीं मिली है, लेकिन मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। भट्ठा मालिक को थाने बुलाया गया है। हमारी प्राथमिकता बच्ची का सही इलाज और परिवार को उचित आर्थिक मदद दिलवाना है।

खड़े होते सवाल
यह हादसा उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो ड्राइविंग के समय मोबाइल को अपनी और दूसरों की जान से ज्यादा कीमती समझते हैं। क्या एक मासूम की जिंदगी से खेलने वाले इस रसूखदार मालिक पर कड़ी कार्रवाई होगी? या गरीबी के दबाव में इस मामले को दबा दिया जाएगा?

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