फिल्म उदयपुर फाइल्स देखने का प्लान बना रहे दर्शकों के लिए एक बैड न्यूज है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा कन्हैया लाल पर बनी उदयपुर फाइल्स पर रोक लगा दी गई है। इस रोक का कारण सामूहिक भावनाओं को आहत करना और सांप्रदायिक सौहार्द के बिगाड़ने तथा देश में अशांति फैलने की संभावनाएं हैं। यह फैसला एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया गया, जिसमें फिल्म पर संवेदनशील धार्मिक भावनाओं को भड़काने का आरोप लगाया गया है।

कोर्ट का फैसला

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अनीश दयाल की खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि भारत सरकार के पास सिनेमेटोग्राफ एक्ट, 1952 की धारा 6 के तहत यह अधिकार है कि वह किसी फिल्म की रिलीज को रोक सकती है, यदि उसे लगता है कि वह सार्वजनिक शांति, नैतिकता या सुरक्षा के लिए खतरा हो सकती है।

कोर्ट ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार इस मामले पर कोई निर्णय नहीं लेती, तब तक ‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज पर अंतरिम रोक जारी रहेगी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता संस्था जमीयत उलेमा-ए-हिंद से यह भी कहा कि वह फिल्म के सर्टिफिकेट को चुनौती देने के लिए सरकार को औपचारिक अर्जी दे।

साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह इस विवाद पर सात दिनों के भीतर उचित निर्णय ले और अदालत को उसकी जानकारी दे। 

क्या है फिल्म का विवाद?
फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ वर्ष 2022 में राजस्थान के उदयपुर में हुए दर्जी कन्हैयालाल की हत्या की वास्तविक घटना पर आधारित है। 26 जून 2025 को फिल्म का ट्रेलर जारी किया गया था, जिसके बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने फिल्म के खिलाफ याचिका दायर की।

याचिका में यह दावा किया गया है कि फिल्म के कई दृश्य एक विशेष समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाते हैं और इससे समाज में धार्मिक तनाव और कट्टरता को बढ़ावा मिल सकता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस तरह की फिल्में संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के विरुद्ध जाती हैं।
  

गुरुवार को मामले में सेंसर बोर्ड ने तर्क दिया कि फिल्म से सभी विवादित सीन हटा दिए गए हैं। कोर्ट ने इस पर निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल को फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग कराई जाए ताकि वह स्वयं जांच सकें कि फिल्म में आपत्तिजनक सामग्री शेष है या नहीं।

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