सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पहलगाम आतंकी हमले की न्यायिक जांच की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। एससी ने याचिकाकर्ता को फटकार भी लगाई। कोर्ट ने कहा कि ऐसी याचिकाएं सेना का मनोबल गिराने का प्रयास करती हैं, ऐसे समय में जब देश का प्रत्येक नागरिक आतंकवाद से लड़ने के लिए एकजुट है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका फतेश साहू, जुनैद मोहम्मद और विकी कुमार नाम के याचिकाकर्ताओं ने दाखिल की थी।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ऐसी जनहित याचिकाएं दायर करने से पहले जिम्मेदारी से काम लीजिए। देश के प्रति भी आपका कर्तव्य है। क्या आप इस तरह से हमारे सुरक्षा बलों का मनोबल गिराना चाहते हैं? हमें इस जांच के लिए विशेषज्ञता कब से मिल गई?

‘सेना का मनोबल न गिराएं’

याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण समय है जब देश के प्रत्येक नागरिक ने आतंकवाद से लड़ने के लिए हाथ मिलाया है। ऐसी याचिकाएं दायर करके हमारी सेना का मनोबल न गिराएं। बता दें कि पीठ में न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह भी शामिल थे।

‘याचिका वापस लेने को तैयार’

कोर्ट को वकील साहू ने स्पष्ट किया कि उनका इरादा सुरक्षा बलों का मनोबल गिराने का नहीं था और वह अपनी याचिका वापस लेने को तैयार हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि उनकी चिंता राज्य में पढ़ रहे छात्रों के लिए है।

याचिका वापस लेने की दी अनुमति

केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि ऐसी याचिकाएं हाईकोर्ट में भी नहीं जानी चाहिए। अदालत ने याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की अनुमति दी और केवल छात्रों की सुरक्षा के पहलू पर साहू को संबंधित हाई कोर्ट में जाने की अनुमति दी।

पहलगाम हमले में 26 लोगों की हुई मौत

बता दें कि जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रेल को आतंकवादियों द्वारा पर्यटकों पर की गई गोलीबारी की गई। इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई जबकि कई घायल हो गए। पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने हमले की जिम्मेदारी ली। इस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर कई सख्त कदम उठाए है।

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