पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की निर्णायक जवाबी कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय ने ऐतिहासिक कदम बताया है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साहसिक और दृढ़ निर्णय का खुलकर समर्थन किया है।

12 मई 2025 को प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में प्रो. तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री का संबोधन भारत के आतंकवाद विरोधी प्रयासों में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। यह देश की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में एक निर्णायक बदलाव का संकेत देता है।

प्रो. तिवारी ने कहा, “इस चुनौतीपूर्ण समय में प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी और अडिग नेतृत्व के लिए हम उनका हृदय से आभार प्रकट करते हैं। उन्होंने स्पष्टता, साहस और दृढ़ता के साथ विश्व को दिखा दिया है कि भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के प्रति किसी भी प्रकार के खतरे के सामने कभी झुकेगा नहीं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के सफल संचालन के माध्यम से भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है हम आतंक को बर्दाश्त नहीं करेंगे, हम झुकेंगे नहीं हम पूरी ताकत और उद्देश्य के साथ जवाब देंगे।”

प्रो. तिवारी के अनुसार प्रधानमंत्री द्वारा एटॉमिक ब्लैकमेल की धमकियों को नजरअंदाज करना और प्रायोजित आतंकवाद की कड़ी निंदा करना एक नए भारत की पहचान है। यह भारत संप्रभु, आत्मनिर्भर और राष्ट्रीय सम्मान के मामलों में अडिग है। उन्होंने यह भी कहा कि अब भारत और पाकिस्तान के बीच कोई भी वार्ता केवल आतंकवाद और पीओके पर केंद्रित होगी।

भारतीय आध्यात्मिक विरासत का जिक्र करते हुए प्रो. तिवारी ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक ‘यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्‌॥’ का उल्लेख किया और कहा कि जब अधर्म बढ़ता है और धर्म कमजोर होता है तब संतुलन स्थापित करने के लिए निर्णायक कार्रवाई आवश्यक हो जाती है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ऐसा ही एक निर्णायक कदम है जो आतंकवाद के खात्मे और निर्दोषों की रक्षा के लिए उठाया गया है।

प्रो. तिवारी ने यह भी कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ सिर्फ एक नाम नहीं है बल्कि यह लाखों भारतीयों की भावनाओं का प्रतीक है। यह मातृत्व का प्रतीक है जिसके बिना कोई सभ्यता नहीं टिक सकती। यह अभियान भारतीय सभ्यता के उस मूल विचार को दर्शाता है जिसमें निशाना सिर्फ आतंकवादी ठिकानों तक ही सीमित था। भारतीय सेना की सटीकता ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह लड़ाई आतंकवाद के खिलाफ थी आम नागरिकों के खिलाफ नहीं।

अपने बयान के अंत में प्रो. तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री का संबोधन सिर्फ एक भाषण नहीं बल्कि राष्ट्र की एकता का आह्वान भारत की शक्ति का पुनर्स्मरण और यह ऐलान था कि आतंक और वार्ता साथ नहीं चल सकते जैसे खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।

प्रो. तिवारी ने दृढ़ता से कहा कि पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय हमारे वीर सैनिकों के साहस और हमारे नेतृत्व की अडिग दृढ़ता को सलाम करता है। हम अपने सैनिकों के साथ हैं। हम अपने प्रधानमंत्री के साथ हैं। हम निर्भीक संप्रभु भारत के साथ हैं।

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