कर्नाटक के करवार अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक के लिए बड़ी खबर आई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने इस बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। जिसके चलते वह बैंक आज से पूरी तरह से बंद हो गया है। इस फैसले के बाद बैंक की सभी बैंकिंग सेवाएं बंद हो गई हैं और ग्राहकों के पैसे फिलहाल फंसे हुए हैं। हालांकि, डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के तहत ₹5 लाख तक की जमा राशि का बीमा उपलब्ध है, जिससे अधिकांश ग्राहकों को अपनी जमा राशि की वापसी होने की उम्मीद है। लेकिन ₹5 लाख से अधिक जमा रखने वाले ग्राहकों को अपनी बाकी रकम वापस मिलने में समय लग सकता है।
यह कदम बैंक की वित्तीय स्थिति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है। RBI के आदेश के मुताबिक, बैंक अब 23 जुलाई 2025 से अपना बैंकिंग व्यवसाय जारी नहीं रख पाएगा। RBI ने इस फैसले का कारण बताया कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी नहीं है और भविष्य में लाभ कमाने की भी संभावना नहीं दिखती। बैंकिंग नियमन अधिनियम, 1949 के तहत आवश्यक नियमों का पालन न करने के कारण इस कार्रवाई को जरूरी माना गया। साथ ही, RBI ने कर्नाटक के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि वे बैंक के बंद होने की प्रक्रिया को पूरा करें और एक लिक्विडेटर नियुक्त करें, जो बैंक की संपत्तियों का प्रबंधन करेगा।
बैंक में जमा रकम रखने वाले ग्राहकों के लिए राहत की खबर यह है कि डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के तहत खाताधारकों को पांच लाख रुपये तक की राशि का बीमा सुरक्षा मिलेगी। RBI के अनुसार, इस बैंक के लगभग 92.9 प्रतिशत खाताधारकों को उनकी जमा राशि पूरी मिलेगी। 30 जून 2025 तक DICGC ने लगभग 37.79 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुका है। RBI ने स्पष्ट किया है कि बैंक की मौजूदा वित्तीय हालत को देखते हुए इसे आगे बैंकिंग कारोबार करने की अनुमति देना ग्राहकों और जनता के हित में नहीं होगा, इसलिए यह सख्त कदम उठाया गया।
RBI ने लाइसेंस रद्द क्यों किया?
बैंक की पूंजी अपर्याप्त होने और नियामक नियमों का पालन न करने के कारण।
खाताधारकों को कितना इंश्योरेंस मिलेगा?
DICGC के तहत पांच लाख रुपये तक का बीमा सुरक्षा।
बैंक ने कब अपना कारोबार बंद किया?
23 जुलाई 2025 की शाम 5 बजे से बैंक ने सभी बैंकिंग गतिविधियां रोक दीं।
