चीन पिछले कुछ महीनों से ताइवान पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हाल ही में एक नई रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी बड़े सैन्य कदम का चीन के लिए कितना भारी मूल्य हो सकता है। जर्मन मार्शल फंड द्वारा प्रकाशित अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट “If China Attacks Taiwan” में चेतावनी दी गई है कि अगर चीन ताइवान पर समुद्री हमला करता है, तो उसे लगभग 1 लाख सैनिकों की मौत जैसी गंभीर कीमत चुकानी पड़ सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान की सेना और अमेरिकी समर्थन से चीन की आपूर्ति लाइनों में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। जर्मन मार्शल फंड को अमेरिकी सरकार से भी फंडिंग मिलती है। रिपोर्ट में छोटे और बड़े संघर्ष दोनों के परिदृश्यों का विश्लेषण किया गया है।

युद्ध के संभावित परिदृश्य

रिपोर्ट के लेखक और अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो जैक कूपर ने कहा कि किसी भी पूर्ण युद्ध की शुरुआत चीन की समुद्री सेना के ताइवान के तट पर हमले से होगी। इसमें ताइवान की सेना, जापान और गुआम में तैनात अमेरिकी बल भी निशाने पर होंगे।

यदि युद्ध होता है, तो चीन के सैनिक ताइवान के तट तक पहुंच सकते हैं, लेकिन उन्हें आपूर्ति और समर्थन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि संघर्ष कई महीने तक चल सकता है और इस दौरान चीन को बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ सकता है।

  • चीन: लगभग 1 लाख सैनिकों की मौत।
  • ताइवान: लगभग 50,000 सैनिक और 50,000 नागरिक।
  • अमेरिका: 5000 सैनिक और 1000 नागरिक।
  • जापान: 1000 सैनिक और 500 नागरिक।

किनमेन और मत्सू द्वीपों का कब्जा

रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि भले ही चीन ताइवान के मुख्य द्वीप से पीछे हट जाए, लेकिन उसकी सेनाएं किनमेन और मत्सू द्वीपों पर कब्जा बनाए रख सकती हैं। इसका मतलब है कि चीन को पूर्ण रूप से हराया जा सकता है, लेकिन ताइवान को कुछ क्षेत्रों का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं का आकलन

रिपोर्ट में चीन के संभावित अंतरराष्ट्रीय नुकसान का भी विश्लेषण किया गया है। बड़े युद्ध की स्थिति में, कुछ कदमों को सबसे ज्यादा प्रभावी माना गया है, जैसे कि चीनी नेताओं की संपत्ति को फ्रीज करना। वहीं, ताइवान की स्वतंत्रता को मान्यता देना या एशियाई सुरक्षा गठबंधन बनाना कम संभावित विकल्प बताए गए हैं। छोटे संघर्ष की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया सीमित होगी, जिसमें हवाई और समुद्री क्षेत्रों में लड़ाई और प्रमुख बंदरगाहों का क्वारंटाइन शामिल हो सकता है।

रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब चीन ने ताइवान के आसपास बड़े सैन्य अभ्यास किए थे। इनमें समुद्री और हवाई ऑपरेशन शामिल थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि बीजिंग संभावित संघर्ष के लिए तैयारी कर रहा है।

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