अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि शनिवार को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मारने वाले अमेरिकी और इजरायली हवाई हमले में वे लोग भी मारे गए जिन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका ने उनके सबसे संभावित उत्तराधिकारी के रूप में पहचाना था, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस्लामी गणराज्य का अगला नेतृत्व कौन करेगा। रविवार रात को अमेरिकी चैनल एबीसी न्यूज के मुख्य वाशिंगटन संवाददाता जोनाथन कार्ल के साथ फोन पर हुई बातचीत में ट्रंप ने ये टिप्पणियां कीं। कार्ल के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि यह हमला इतना सफल रहा कि इसने अधिकांश उम्मीदवारों को नॉकआउट कर दिया। अब इनमें से कोई भी उम्मीदवार नहीं बचेगा, क्योंकि वे सभी मारे जा चुके हैं। दूसरे या तीसरे स्थान पर रहने वाले भी खत्म हो चुके हैं।

शुरुआत में ट्रंप ने कार्ल को बताया था कि अमेरिका को ईरान के नए नेतृत्व के स्वरूप का अच्छा अंदाजा है। लेकिन बातचीत आगे बढ़ने पर उन्होंने अपना रुख बदलते हुए कहा कि इस हमले ने उन्हीं लोगों को खत्म कर दिया है। ईरान की न्यायपालिका ने पुष्टि की है कि खामेनेई के शीर्ष सलाहकार अली शमखानी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के प्रमुख जनरल मोहम्मद पाकपुर उन लोगों में शामिल थे जो मध्य तेहरान में खामेनेई के परिसर पर अमेरिका-इजरायल के हमले में मारे गए थे। खामेनेई के परिवार के चार सदस्य, जिनमें उनकी बेटी और एक पोता भी शामिल हैं, मारे गए।

पेंटागन ने इस ऑपरेशन को ‘एपिक फ्यूरी’ नाम दिया है और बताया है कि तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए और पांच गंभीर रूप से घायल हुए। प्रमुख उम्मीदवारों के बाहर हो जाने के बाद, अब यह स्पष्ट नहीं है कि अगला नेता कौन बनेगा। ईरान के संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन, न्यायपालिका के प्रमुख और संरक्षक परिषद के एक वरिष्ठ धर्मगुरु वाली एक अस्थायी परिषद अंतरिम रूप से सर्वोच्च नेता की शक्तियां संभालेगी। ये धर्मगुरु अयातुल्ला अलीरेज़ा अराफ़ी हैं, जिन्हें फिलहाल अंतरिम नेता माना जा रहा है। अराफ़ी के भविष्य को लेकर भी ऑनलाइन काफी चर्चा हो रही है, क्योंकि उन्होंने अभी तक कोई सार्वजनिक उपस्थिति या भाषण नहीं दिया है।

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