पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्वतंत्रता दिवस से पहले एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि “अगर बंगाल नहीं होता तो भारत को आजादी नहीं मिलती”। ‘कन्याश्री’ योजना की 12वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही। ममता बनर्जी ने बंगाल को विविधता में एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह आशा की किरण है।

‘राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और जय हिंद बंगाल की रचना’
ममता बनर्जी ने इस दौरान कई ऐतिहासिक हस्तियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बंगाल की माटी में रवींद्रनाथ टैगोर, नजरूल इस्लाम और सुभाष चंद्र बोस जैसी महान हस्तियों ने जन्म लिया, जिन्होंने देश की नियति को आकार दिया। उन्होंने यह भी बताया कि देश का राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और ‘जय हिंद’ का नारा भी बंगालियों की ही रचनाएँ हैं। उन्होंने दावा किया कि देश के ज़्यादातर स्वतंत्रता सेनानी बंगाल से थे और सेलुलर जेल के लगभग 70 प्रतिशत कैदी बंगाली थे।

भाषा और एकता पर दिया जोर
ममता बनर्जी ने देश के लोगों से संकीर्णता और विभाजनकारी विचारों को छोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बंगाल विविधता के बीच सद्भाव और एकता का प्रतीक है। उन्होंने हाल ही में नोएडा में हुई एक घटना का जिक्र किया, जहाँ एक पिता-पुत्र को बांग्ला बोलने के कारण होटल में रुकने की अनुमति नहीं दी गई थी। उन्होंने सवाल उठाया, “अगर हम आपकी भाषाओं का सम्मान कर सकते हैं, तो आप हमारी भाषाओं का सम्मान क्यों नहीं कर सकते?”

केंद्र सरकार पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने इस दौरान केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र बंगाल को फंड से वंचित कर रहा है और उच्च शिक्षा में छात्रवृत्ति पर अंकुश लगा रहा है। उन्होंने कहा कि UGC ने शोध गतिविधियों के लिए फंड देना बंद कर दिया है, जिसकी वजह से राज्य सरकार अब इन गतिविधियों को खुद प्रायोजित कर रही है।

‘कन्याश्री’ योजना की सफलता
ममता बनर्जी ने अपनी सरकार की सफल ‘कन्याश्री’ योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस योजना से अब तक 93 लाख छात्राओं को फायदा मिला है और अगले साल यह संख्या एक करोड़ को पार कर जाएगी। उन्होंने बताया कि इस योजना का उद्देश्य बाल विवाह को रोकना और छात्राओं को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है।

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