सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भागवताचार्यों की पिटाई को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भागवताचार्यों के साथ हुई घटना सोचीं समझी साजिश का हिस्सा है। चोटी सम्मान सम्मान की निशानी है। उसको काट दिया गया है। भगवान को जातियों के में बांटने का काम किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने भागवत कथा करने के संबंध में भी सवाल पूछा है कि इस पर किसका एकाधिकार है? अखिलेश यादव फर्रुखाबाद में आयोजित निजी कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आए थे। आपको बता दें कि इटावा में नाम बदलकर, अपनी पहचान छुपा कर भागवत कथा करने आए लोगों की पिटाई की गई थी और उनके बाल काट दिए गए। अखिलेश यादव ने मार खाए भागवताचार्यों को अपने कार्यालय में बुलाकर उन्हें सम्मानित किया था।
फर्रुखाबाद पहुंचे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने पूछा कि भागवत कथा कौन कह सकता है? इस पर किसका एक अधिकार है? भाजपा भारत को विकसित और विश्व गुरु बनाने का सपना दिखा रही है। वहीं इस प्रकार की घटनाएं भी सामने आ रही है। इनके खिलाफ बोलने वाले को सनातन विरोधी मान लिया जाता है। वर्चस्व और शोषण करने वाले लोगों की समाज में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। एक दूसरे को समाज ने बहकने का काम किया जा रहा है। जातियों को वापस में लड़ाया जा रहा है। इसी साजिश के तहत यादवों को भड़काया गया है।
उत्तर प्रदेश के हालात ठीक नहीं
अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश की हालत चिंता जनक है। जो घटनाक्रम हो रहे हैं। वह ठीक नहीं है। बीजेपी धर्म और जाति के नाम पर लोगों को आपस में लड़ा रही है। जो नकारात्मक राजनीति करने वाला है। आज हम आपातकाल को याद कर रहे हैं। लेकिन इस समय भाजपा की अघोषित इमरजेंसी भी चल रही है। उसे भी याद करना चाहिए। आज सच पर पाबंदी है।
