अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मुजफ्फरनगर के वृद्धाश्रम में भावुक नज़ारा: क्रांतिकारी शालू सैनी ने कहा “माताओं की सेवा ही सबसे बड़ा महिला सम्मान”
मुजफ्फरनगर (नीरज प्रजापति)। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुजफ्फरनगर के दक्षिणी कृष्णापुरी स्थित क्रांतिकारी शालू सैनी वृद्धा आश्रम एवं अनाथालय में भावनाओं से भरा एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। समाजसेवी संस्था साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष और आश्रम की संचालिका क्रांतिकारी शालू सैनी के नेतृत्व में यह आयोजन बड़े उत्साह, सम्मान और अपनत्व के माहौल में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज द्वारा उपेक्षित और बेसहारा वृद्ध माताओं को सम्मान देना तथा उनके चेहरे पर मुस्कान लाना रहा। कार्यक्रम की शुरुआत आश्रम की वृद्ध माताओं के साथ केक काटकर की गई। जैसे ही केक काटा गया, पूरा आश्रम “महिला शक्ति जिंदाबाद” और “मातृ शक्ति अमर रहे” के नारों से गूंज उठा। इस दौरान शालू सैनी ने आश्रम में रह रही सभी वृद्ध माताओं को उपहार भेंट किए और उनके स्वास्थ्य, खुशहाली व दीर्घायु की कामना की। कार्यक्रम के दौरान वातावरण उस समय बेहद भावुक हो गया जब क्रांतिकारी शालू सैनी ने वृद्ध माताओं को संबोधित करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में महिला सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें होती हैं, लेकिन उनके लिए असली महिला सशक्तिकरण उन माताओं की सेवा करना है जिन्होंने अपना पूरा जीवन परिवार को समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि ये वो माताएं हैं जिन्होंने अपने जीवन का हर पल अपने बच्चों और परिवार के लिए समर्पित कर दिया। लेकिन आज जब उन्हें प्रेम और सम्मान की सबसे अधिक आवश्यकता है, तब कई बार समाज उन्हें अकेला छोड़ देता है। मेरे लिए इन माताओं की सेवा करना ही सबसे बड़ा महिला सम्मान है। जब तक मेरी सांसें चलेंगी, मैं इन माताओं की बेटी बनकर उनकी सेवा करती रहूंगी।”
क्रांतिकारी शालू सैनी ने बताया कि उनका आश्रम केवल बुजुर्गों की देखभाल का स्थान नहीं बल्कि एक परिवार है, जहां हर बुजुर्ग को अपनेपन और सम्मान का एहसास कराया जाता है। उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ती संवेदनहीनता को खत्म करने के लिए हर व्यक्ति को अपने घर के बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि महिला दिवस केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं है, बल्कि उन महिलाओं के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है जिन्होंने हमें संस्कार, संस्कृति और जीवन के मूल्यों की शिक्षा दी। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने माता-पिता और बुजुर्गों को कभी अकेला न छोड़ें और उनका सम्मान करें। क्रांतिकारी शालू सैनी लंबे समय से समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे न केवल बेसहारा बुजुर्गों की सेवा कर रही हैं बल्कि लावारिस और बेसहारा मृतकों का अंतिम संस्कार कर समाज में मानवता की मिसाल भी पेश कर रही हैं। उनके इस सेवा भाव की क्षेत्र में व्यापक सराहना होती रही है। कार्यक्रम के अंत में आश्रम की वृद्ध माताओं ने शालू सैनी को आशीर्वाद देते हुए उनके सेवा भाव की प्रशंसा की। कई माताएं भावुक हो गईं और उन्होंने कहा कि शालू सैनी उनके लिए बेटी से कम नहीं हैं, जो हर परिस्थिति में उनका सहारा बनकर खड़ी रहती हैं। इस अवसर पर कई सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे, जिन्होंने क्रांतिकारी शालू सैनी के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि समाज में ऐसे लोगों की जरूरत है जो निस्वार्थ भाव से मानव सेवा के लिए समर्पित हों। कार्यक्रम का समापन माताओं के आशीर्वाद और समाज में सेवा व सम्मान का संदेश देने के साथ हुआ। यह आयोजन न केवल महिला दिवस का उत्सव बना बल्कि समाज को यह भी याद दिला गया कि वास्तविक महिला सम्मान उन माताओं की सेवा में है जिन्होंने हमें जीवन दिया।
